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अहमदाबाद प्लेन हादसे का एक साल: हादसे में इकलौते बचे शख्स बोले-जिंदा रहने की कीमत रोज चुका रहा, सबको पता चले उस दिन क्या हुआ

अहमदाबाद9 दिन पहले

कॉपी लिंकहादसे के अगले दिन PM मोदी ने अस्पताल में विश्वास से मुलाकात की थी। - Dainik Bhaskar

हादसे के अगले दिन PM मोदी ने अस्पताल में विश्वास से मुलाकात की थी।

‘12 जून 2025 के उस मनहूस दिन को पूरा साल हो गया। पर मेरे लिए वक्त वहीं ठहरा है। लोग मुझे ‘चमत्कारी’ कहते हैं, क्योंकि अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही जब एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर क्रैश हुआ, तो उसमें सवार 260 लोगों में से सिर्फ मैं अकेला जिंदा बचा था। पर सच कहूं, तो इस जिंदा रहने की कीमत मैं हर रोज अपनी आत्मा का एक हिस्सा देकर चुका रहा हूं।

इस दुर्घटना के एकमात्र सर्वाइवर विश्वास कुमार रमेश ने अपने भाई को भी इस क्रैश में खो दिया था। रमेश ने कहा कि हादसे की कैसी भी जांच हो, मेरा भाई तो नहीं लौटा सकती। लेकिन, हम सभी को यह जानने का पूरा हक है कि उस दिन हुआ क्या था। भावुक अपील में विश्वास ने जांचकर्ताओं द्वारा अंतिम रिपोर्ट जारी किए जाने से पहले ‘ईमानदारी, पारदर्शिता की मांग की है।

हादसे के बाद रमेश पैदल चलकर बाहर आए थे

प्लेन हादसे के बाद रमेश विश्वास कुमार घटनास्थल से पैदल चलकर बाहर आए थे।

प्लेन हादसे के बाद रमेश विश्वास कुमार घटनास्थल से पैदल चलकर बाहर आए थे।

रमेश ने कहा- आज भी वह खौफनाक मंजर दिखाई देता है

रमेश ने कहा- ‘आज भी आंखें बंद करता हूं, तो मुझे वो चीखें, आग और वो खौफनाक मंजर दिखाई देता है। मैं बच तो गया, लेकिन गहरे मानसिक जख्मों के साथ। आज त्रासदी की पहली बरसी है। नागरिक उड्डयन मंत्री ने पिछले महीने कहा था कि जांच ‘अंतिम चरण’ में है और रिपोर्ट बरसी तक आ जाएगी।’हादसे के ठीक 30 दिन बाद शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि टेक-ऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों फ्यूल स्विच ‘कट-ऑफ’ पोजीशन पर आ गए थे, जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया। पर ऐसा क्यों हुआ? यह तकनीकी खराबी थी या किसी की लापरवाही? इस सवाल का जवाब सालभर बाद भी नहीं मिला है।मुझे और मेरे जैसे सैकड़ों पीड़ित परिवारों को सिर्फ तीन चीजें चाहिए- ईमानदारी, पारदर्शिता और हमारे सवालों के जवाब। कोई भी रिपोर्ट मेरे भाई को लौटा नहीं सकती, न ही उन 260 लोगों को जिंदा कर सकती है। पर प्रभावित परिवारों को यह जानने का हक है कि उनके अपनों के साथ उस दिन क्या हुआ था।हादसे के बाद से मेरी जिंदगी पटरी से उतर चुकी है। एअर इंडिया ने मदद के लिए 21,500 पाउंड (लगभग 23 लाख रुपए) दिए थे, पर वह रकम इस कड़वी हकीकत के सामने बहुत छोटी है। मानसिक आघात के कारण मैं काम पर सामान्य रूप से नहीं लौट पाया हूं। लंदन में मेरा परिवार हर महीने 1,000 पाउंड (एक लाख रु. से कम) में गुजारा करने को मजबूर है।मेरे प्रतिनिधि संजीव पटेल ने कई बार एअर इंडिया के सीईओ से मिलने का समय मांगा, पर उन्होंने जरूरी नहीं समझा। हाल में एअर इंडिया अधिकारियों व टाटा समूह प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई, पर मुआवजे और मदद से जुड़े अहम मुद्दे अब भी अधर में हैं। ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद मुझे या अन्य ब्रिटिश पीड़ित परिवारों को यूके सरकार से मदद नहीं मिली।हमारे वकील कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है ताकि असली जिम्मेदार तय हो सके। एअर इंडिया प्रवक्ता संपर्क में होने की बात करते हैं, पर अब वादों से ज्यादा ठोस नतीजों की जरूरत है। हर दिन न्याय की उम्मीद में जागता हूं, ताकि मेरे जैसे सैकड़ों परिवार इस दर्द से थोड़ा सा उबर सकें।’अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एअर इंडिया का AI17 प्लेन क्रैश हुआ था।

अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एअर इंडिया का AI17 प्लेन क्रैश हुआ था।

एअर इंडिया ने 96% पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया

एयर इंडिया ने गुरुवार को कहा कि उसने अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए विमान हादसे से प्रभावित 96% परिवारों को 25-25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा दे दिया है। जिनके डॉक्यूमेंटेशन अधूरे हैं या जहाँ परिवार में झगड़े चल रहे हैं, उन परिवारों को ही मुआवजा नहीं मिला है।साथ ही जमीन पर घायल हुए 94% लोगों को या तो एक बार में पूरा मुआवजा मिला है। बाकी लोगों ने हेल्पडेस्क से फॉर्म ले लिए थे, लेकिन अभी तक उन्हें जमा नहीं किया है।

टाटा संस ने AI171 हादसे से प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए AI171 मेमोरियल और वेलफ़ेयर ट्रस्ट बनाया है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सभी मरने वालों के परिवारों के लिए ₹1 करोड़ की मदद की घोषणा की थी। 91% परिवारों को पूरे ₹1 करोड़ दिए जा चुके हैं।

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