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अहमदाबाद प्लेन हादसे का एक साल: प्लेन में बैठने से डरते हैं मरने वालों के परिवार; कुछ अब भी काउसिंलिंग करवा रहे

Hindi NewsNationalAhmedabad Air India Plane Crash Tragedy; Gujarat DGP | DNA Police Rescue Operation

अहमदाबाद9 दिन पहले

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अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 दुर्घटना को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन हादसे की भयावह यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।

12 जून 2025 को लंदन जाने वाली AI-171 फ्लाइट मेघानीनगर में BJ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराकर क्रैश हो गई, जिसमें विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई। सिर्फ एक यात्री जिंदा बचा था।

भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के एक साल बाद भी BJ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में उस त्रासदी के निशान पूरी तरह मिट नहीं पाए हैं। जहां विमान का मलबा गिरा था, लोगों के शव मिले थे, वहां आज भी खून के धब्बे दिखाई देते हैं।

इधर हादसे में मरने वालों के परिवार आज भी सदमें में हैं। कुछ लोग अभी भी उड़ान भरने से डरते हैं, जबकि कुछ लोग इस गहरे सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग ले रहे हैं।

अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एअर इंडिया का AI17 प्लेन क्रैश हुआ था। यह फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन जा रही थी लेकिन टेक-ऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी।

अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एअर इंडिया का AI17 प्लेन क्रैश हुआ था। यह फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन जा रही थी लेकिन टेक-ऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी।

प्लेन हादसे के पीड़ित परिवारों ने कहा- डिप्रेशन से जूझ रहे, हवाई यात्रा नहीं करते

बेटा खोया, प्लेन की आवाज से भी डरते हैं रफीक: दीव के रहने वाले रफीक अरब ने पिछले साल 12 जून को अपने 25 साल के बेटे फैजान को खोने के बाद से कभी हवाई यात्रा नहीं की है। वे अब भी गहरे डर के साथ जी रहे हैं। रफीक बताते हैं- ऊपर से गुजरते विमान की आवाज भी हमें बेचैन कर देती है।माता-पिता की मौत के बाद नौकरी छोड़ी, मुक्ति ने महीनों काउसिंलिंग करवाई: सूरत की रहने वाली मुक्ति वंसदिया के माता-पिता दिव्या और अर्जुनसिंह हादसे में मारे गए थे। हादसे के बाद मुक्ति डिप्रेशन से जूझने लगीं। उन्होंने ट्रैवल एजेंसी की अपनी नौकरी छोड़ दी और महीनों तक काउंसलिंग लीं।माली का काम छूटा, पत्नी छोड़ गई, हादसे के चश्मदीद थे अजय परमार: घर से लौटते समय हादसे की चपेट में आए अजय का 2 महीने इलाज चला था। डॉक्टरों ने सीधी धूप में काम करने से मना किया। रंग-रूप बदलने और काम छूटने के कारण शादी के एक महीने बाद ही उनकी पत्नी भी छोड़कर चली गई।पास की झोपड़ी में रहने वाले जेनाभाई बोले- तीन धमाके हुए: जेनाभाई हादसे वाले जगह के पास झोपड़ी में रहते है। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन मेरी छुट्टी थी। वहां तीन धमाके हुए, पहला धमाका बम जैसा लगा। मैं भागा तो सामने पेड़ में आग लग गई। दूसरे धमाके में मैं भी गिर गया। छाती में चोट लग गई। मैं उठा और भागा। मुझे दो महीने बाद मुझे अपनी झोपड़ी में वापस जाने दिया।

जिस हॉस्टल पर विमान गिरा था, वहां के हाल

जिस हॉस्टल पर विमान गिरा उसके पीछे 10 से अधिक दोपहिया और चारपहिया वाहन मिले हैं। ये वाहन उस समय हॉस्टल में मौजूद छात्रों के थे। ये वाहन जलकर राख हो चुके हैं और जंग लगने से इनका रंग भी बदल गया है। आग लगने से इन सभी वाहनों के टायर जल चुके हैं। वाहनों के केवल स्टील के पहिये ही बचे हैं। किसी भी वाहन में इंजन या बैटरी दिखाई नहीं दे रही थी।

बुलेट, कार, बाइक, साइकिल सहित 10 से अधिक वाहन संभवतः उसी हालत में हॉस्टल में थे, जिस हालत में उन्हें 12 जून को दोपहर 1:40 बजे से पहले छोड़ा गया था।

कई छात्र दोपहर के भोजन के लिए मेस में आते थे। मेस दो मंजिला था, जिसमें ज्यादातर छात्र दोपहर के भोजन के लिए पहली मंजिल पर आते थे। विमान का पिछला हिस्सा मेस के पिछले हिस्से से टकराया था।दुर्घटना के दो दिन बाद विमान के पिछले हिस्से में एयर होस्टेस का शव मिला था।

मेघानीनगर एफएसएल चौराहे से घोड़ा कैंप की ओर जाने वाली सड़क से गुजरने वाला हर व्यक्ति हादसे वाली जगह आज भी अपनी गाड़ी की गति धीमी कर देता है। कुछ लोग वीडियो बनाने के लिए रुक जाते हैं, जबकि कुछ लोग खड़े होकर चर्चा करते हैं। कुछ लोग मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर महीने यहां आते हैं।

कॉलेज के हॉस्टल की 4 तस्वीरें…

जिस हॉस्टल पर प्लेन का हिस्सा गिरा था, वहां कई कमरे बंद पड़े हैं। कई हिस्सों में मरम्मत का काम हुआ है, लेकिन हादसे के निशान अब भी मौजूद हैं।

जिस हॉस्टल पर प्लेन का हिस्सा गिरा था, वहां कई कमरे बंद पड़े हैं। कई हिस्सों में मरम्मत का काम हुआ है, लेकिन हादसे के निशान अब भी मौजूद हैं।

हादसे के दौरान हुए विस्फोट और आग ने इमारत को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया।

हादसे के दौरान हुए विस्फोट और आग ने इमारत को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया।

विमान की टेल इसी हिस्से में आकर फंस गई थी।

विमान की टेल इसी हिस्से में आकर फंस गई थी।

हादसे वाले दिन ये वाहन जहां थे वहीं जल गए। मलबा अब भी यहीं पड़ा है।

हादसे वाले दिन ये वाहन जहां थे वहीं जल गए। मलबा अब भी यहीं पड़ा है।

आज भी जब कोई विमान दुर्घटनास्थल के ऊपर से गुजरता है, तो स्थानीय लोग क्षण भर के लिए डर जाते हैं।

आज भी जब कोई विमान दुर्घटनास्थल के ऊपर से गुजरता है, तो स्थानीय लोग क्षण भर के लिए डर जाते हैं।

रेस्क्यू से जुड़े लोगों ने कहा- कटे हुए हाथ को भुला नहीं पा रहा

1. गुजरात DGP ज्ञानेंद्र सिंह मलिक- करियर का सबसे दर्दनाक अध्याय

ज्ञानेंद्र बताते हैं कि यह उनके करियर का सबसे दर्दनाक अध्याय है। उनके जेहन में मलबे से निकाली गई जली हुई लाशों की डरावनी तस्वीरें अभी भी बसी हुई हैं। मलिक ने बताया कि उन्होंने 30 मिनट के भीतर 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को हादसे वाली जगह पर भेज दिया था।

मलिक उस समय अहमदाबाद के कमिश्नर थे। वे हादसे के 15-20 मिनट के अंदर घटनास्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जमीन पर जले हुए शवों को देखना बहुत दर्दनाक था।

DNA मैचिंग के बाद सौंपे गए शवों में से पहला शव दुर्घटना के 50 घंटे से भी कम समय में, 14 जून को दोपहर 3:19 बजे सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद सौंपा गया।

2. फोरेंसिक साइंटिस्ट एचपी संघवी- कटे हुए हाथ को भुला नहीं पा रहा

गुजरात डायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज के डायरेक्टर संघवी और उनकी 38 सदस्यों की टीम की जिम्मेदारी थी कि वे मारे गए लोगों की पहचान करने के लिए बायोलॉजिकल सैंपल की बारीकी से जांच करें और राख से निकाले गए टूटे-फूटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच करके उनसे जो भी जानकारी मिल सके, उसे हासिल करें।

संघवी के लिए, कटे हुए हाथ की वह तस्वीर ऐसी है जिसे वे भुला नहीं पा रहे हैं। संघवी ने बताया कि ऐसा लग रहा था जैसे वह मदद की गुहार लगा रही हो। एक साल बाद भी, हम उसके आखिरी पलों के खौफ की सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं। पहला सैंपल आधी रात के बाद आया और हमारी टीमों ने पहले 100 घंटों में ही 100 DNA प्रोफाइल तैयार कर लिए।

3.108 इमरजेंसी सर्विस मैनेजर जितेंद्र शाही बोले-1000°C की आग से लाशें निकालने में कई बार जूते पिघले

शाही ने बताया कि शुरू में मुझे पता नहीं चला कि यह प्लेन क्रैश है, लेकिन पहली एम्बुलेंस 3 मिनट के अंदर ही मौके पर पहुंच गई थी। क्रैश के बाद वहां का तापमान 1,000°C से ज्यादा था। लाशें निकालते वक्त कई बार हमारे जूते तक पिघल गए। 35 एम्बुलेंस ने कई चक्कर लगाए। लगभग 90 कर्मचारी बचाव कार्य में लगे रहे।

4. SDRF के ASP शीतल गुजर बोले- गीले कंबल और साड़ियों को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया

गुजर ने बताया कि क्रैश साइट पर गर्मी इतनी ज्यादा थी कि यूनिफॉर्म बार-बार बदलने पड़े। कम्युनिकेशन उपकरण खराब हो गए। हमने साड़ियों और गीले कंबल का इस्तेमाल कामचलाऊ रस्सियों और स्ट्रेचर के तौर पर किया। हवा में जलते हुए मांस, केमिकल और पिघली हुई धातु की गंध फैली हुई थी।

एयर इंडिया ने 96% पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया

एयर इंडिया ने गुरुवार को कहा कि उसने अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए विमान हादसे से प्रभावित 96% परिवारों को 25-25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा दे दिया है। जिनके डॉक्यूमेंटेशन अधूरे हैं या जहाँ परिवार में झगड़े चल रहे हैं, उन परिवारों को ही मुआवजा नहीं मिला है।साथ ही जमीन पर घायल हुए 94% लोगों को या तो एक बार में पूरा मुआवजा मिला है। बाकी लोगों ने हेल्पडेस्क से फॉर्म ले लिए थे, लेकिन अभी तक उन्हें जमा नहीं किया है।

टाटा संस ने AI171 हादसे से प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए AI171 मेमोरियल और वेलफ़ेयर ट्रस्ट बनाया है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सभी मरने वालों के परिवारों के लिए ₹1 करोड़ की मदद की घोषणा की थी। 91% परिवारों को पूरे ₹1 करोड़ दिए जा चुके हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें:

अहमदाबाद प्लेन क्रैश जिस हॉस्टल पर हुआ था,वह फिर बनेगा:सुपर स्पेशियलिटी हॉस्टल पर ₹105 करोड़ खर्च होंगे, 236 डॉक्टर रहेंगे

गुजरात के अहमदाबाद में पिछले साल जून में जिस हॉस्टल पर गिरकर प्लेन क्रैश हुआ था, उसकी जगह अब नया आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी हॉस्टल बनाया जाएगा। गुजरात सरकार ने सिविल अस्पताल के पास असरवा स्थित न्यू मेंटल कैंपस में ₹105 करोड़ की लागत से 9 मंजिला हॉस्टल और कैंटीन ब्लॉक बनाने का फैसला लिया है। पढ़ें पूरी खबर…

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