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मां बेटी को दीक्षा दिलाने पर अड़ी, पिता पहुंचा कोर्ट: कहा- 7 साल की बेटी की दीक्षा रुकवाइए, मुझे बच्ची को डॉक्टर बनाना है

सूरत39 मिनट पहले

कॉपी लिंकपिता ने एडवोकेट स्वाति मेहता के जरिए कोर्ट में अर्जी दी। - Dainik Bhaskar

पिता ने एडवोकेट स्वाति मेहता के जरिए कोर्ट में अर्जी दी।

गुजरात के सूरत शहर में रहने वाले एक पिता ने अपनी 7 साल की बेटी के दीक्षा रुकवाने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की है। दरअसल, बच्ची की मां बेटी का दीक्षा संस्कार करवाने पर अड़ी है, जबकि पिता ऐसा नहीं चाहते। मां ने 8 फरवरी को मुंबई में होने वाले सामूहिक दीक्षा समारोह में बेटी का दीक्षा संस्कार करवाने का फैसला किया है।

पिता ने इसे रोकने के लिए कोर्ट में पत्नी के खिलाफ याचिका दायर की है। पिता ने कोर्ट से बेटी की दीक्षा रुकवाने की गुहार लगाते हुए कहा है कि वह अपनी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहते हैं। शेयर मार्केट में काम करने वाले पिता का कहना है कि उनका परिवार बेटी के अच्छी पढ़ाई करवाने में सक्षम है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को निर्धारित की है।

प्रतीकात्मक फोटो।

प्रतीकात्मक फोटो।

बेटी को दीक्षा दिलाने की बात पिता को सोशल मीडिया के जरिए मिली थी। पिता ने अर्जी में कहा है- मेरी बेटी को छोटी उम्र में पढ़ाई-खेलना छुड़वाकर कठोर तपस्या की ओर धकेला जा रहा है और उसे जैन समुदाय के साधु-महात्माओं और आचार्यों को सौंपा जा रहा है, जो मेरे और परिवार के लिए आघातजनक है। हम बच्ची का अच्छा भविष्य देखना चाहते हैं।

बेटे को भी दीक्षा दिलाने की कोशिश की थी रांदेर रोड निवासी पिता का कहना है कि उनके परिवार में एक बेटा-बेटी है। पत्नी छोटी-छोटी बातों पर लड़कर मायके चली जाती थी। साल 2021 में एक दीक्षा कार्यक्रम में बेटे को गुरुजी को समर्पित करने की बात का पति ने विरोध किया। इससे विवाद बढ़ा गया। एक दिन बेटी को अहमदाबाद के एक उपाश्रय में भेज दिया गया।

सूरत फैमिली कोर्ट की फाइल फोटो।

सूरत फैमिली कोर्ट की फाइल फोटो।

मायके गई पत्नी बोली- दीक्षा दिलाओगे तभी घर आऊंगी मायके गई पत्नी ने पति से कहा है कि घर तभी लौटूंगी, जब बेटी को दीक्षा दिलाओगे। मायके वाले भी कहते थे कि दीक्षा तो दिलानी ही है, तुम हां कहो या ना। बाद में पति को पता चला कि बेटी को मुंबई के एक उपाश्रय में भेजा गया है। वहां पिता को बेटी से मिलने नहीं दिया गया। आखिर में पिता ने एडवोकेट स्वाति मेहता के जरिए कोर्ट में अर्जी दी।

यह केस द गार्डियन एंड वार्ड्स एक्ट, 1890 के सेक्शन-3 और 24 के तहत नाबालिग का गार्डियन नियुक्त करने और परमानेंट कस्टडी देने के लिए है। दीक्षा पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। -स्वाति मेहता, एडवोकेट

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मैं जब छोटा था तब मुझे तुफानी लड़का कहते थे। पहले मैं बहुत शरारत करता था, आपको नहीं लगता है तो मेरे सांसारिक माता-पिता से पूछ लीजिएगा। माता-पिता ने भी पूछा था दीक्षा लेकर क्या करोगे। तब मैंने उन्हें बताया था जो भी होगा गुरु महाराज साहब के आदेश से होगा। पूरी खबर पढ़ें…

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